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ईसा मसीह की सच्चाई

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यीशु या यीशु मसीह  अन्य नाम  ईसा मसीह, जिन्हें नासरत का यीशु भी कहा जाता हैं, ईसाई धर्म के प्रवर्तक हैं। ईसाई लोग उन्हें परमपिता   परमेश्वर का पुुत्र और ईसाई त्रिएक परमेश्वर का तृतीय सदस्य   मानते हैं। यीशु मसीह को इस्लाम मे ईसा कहा जाता हैं , और उन्हें  इस्लाम के भी महानतम पैगम्बरो में से एक माना जााता है, तथा कुरान में उनका जिक्र हैं।  क्या यीशु परमेश्वर थे?    पवित्र सद्ग्रंथों में प्रमाण हैैं की परमेश्वर कभी किसी मााँ  के गर्भ से जन्म नही लेेता लेेेकिन यीशु ने मरीयम के गर्भ से जन्म लिया इससे ये प्रमाणित होता हैैं की यीशु भगवान नही थे। वे भगवान के पैगम्बर थे उनकी भक्त्ति सही नही थी इसलिये उनको भगवान से मिलने वाले  लाभ प्राप्त नही हुुुए और दुुुख का सामना करना पड़ा। जगत का तारणहार कोई और है।    पवित्र बाइबल में परमेश्वर का नाम कबीर हैं  । अय्यूब 36:5 ( ऑर्थोडॉक्स यहूदी बाइबल - OJB)  परमेश्वर कबीर शक्तिशाली हैं और विवेकपूर्ण हैं।  अधिक जानकारी के लिए देखे साधना tv 7:30 pm से।

संत रामपाल जी महाराज का समाज सुधार में योगदान

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आज समाज ही नही संसार की दशा किसी से छिपी नही हैं। क्या अमीर, क्या गरीब , क्या शिक्षित और क्या अशिक्षित , इस यथार्थ के विषय मे सभी एक मत हैं की आज का समाज बुरी तरह विकृत हो चुका हैं और संसार ऐसे विषम बिंदु पर पहुँच गया है कि यदि उसकी इस गति को यही पर रोक कर ठीक दिशा में नही बढ़ाया गया तो युग-युग की संचित मानवीय सभ्यता का विनाश अवश्यम्भावी हैं।   वर्तमान दशा और परिवर्तन की पुकार किसी की आँख- कान से परे नही हैं । आज के असहनीय कष्ट सभी देखते, सुनते और अनुभव कर रहे हैं किंतु इस परिवर्तन की मांग को पूरा करने के लिए कौन आगे बढ़े , यह प्रश्न सामने खड़ा होकर स्तब्धता की स्थिति उपस्थित कर देता है। इस संक्रामक काल मे परिवर्तन पूर्ण करने के लिए , सम्पूर्ण समाज का कर्तव्य है की वह योगदान करें किंतु यह सर्वथा सम्भव नही । इस परिवर्तन को प्रस्तुत करने के लिए समाज के एक विशिष्ट वर्ग को ही आगे बढ़ना होगा।      समाज मे फैलने वाली विकृतियां इसी जड़ वर्ग में जन्म लेती ओर पनपती है । यही वह जन साधारण है जो अपनी जड़ता के कारण रोग, शोक , गरीबी , शोषण एवं संतापों से ग्रस्त हैं।...

कलयुग में सतयुग

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कलयुग  कलयुग हिन्दू काल गणना में चार युगों की अवधारणा में चौथा व अंतिम युग हैं। मान्यता अनुसार महाभारत युद्ध 3137 ईपू में हुआ और कलयुग का आरंभ इस युद्ध के 35 वर्ष पश्चात श्री कृष्ण जी के निधन पर हुआ।  वेद पुराणों में सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलयुग का उल्लेख हैं। सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग में भगवान ने अवतार लिए एवं लोक कल्याण के लिए धरती का उद्धार किया और पाप का नाश किया। किंतु कलयुग में तो केवल अहंकार , ईर्ष्या, बुराई, लालच, पाप और वासना ही दिखाई देती हैं ।   कलयुग एक श्रेष्ठ समय परमात्मा प्राप्ति के लिए  वर्तमान समय मे कई सामाजिक कुरीतिया घर कर  चुकी है । यह सब मन अर्थात काल करवाता है । कुरीतिया जैसे-  चोरी, ठगी, दहेज लेना, नशा करना,ईर्ष्या और द्वेश भाव रखना , नाच गाने, सिनेमा देखना , नैतिकता का अभाव , यौन उत्पीड़न की घटनाएं इत्यादि चरम सीमा पर हैं । इसके बावजूद इसी युग मे एक महापुरुष के सानिध्य मेंं  कुरीतियां खत्म हो जााएगी । क्योकि काल ब्रह्म ने परमेश्वर  कबीर से   वचन लिया था की तीनो यूूग ( सतयुग ,त्रेता, द्व...

कैंसर का खात्मा

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कैंसर क्या हैं? ◆कैंसर एक किस्म की बीमारी नही होती यह बल्कि कई रूप में होता हैं। कैंसर के  100 से अधिक प्रकार होते है। अधिकतर कैंसरो के नाम उस अंग या कोशिकाओं के नाम पर रखे जाते हैं जिनमे वे शुरू होते हैं।  कैंसर की कोशिकाओं रक्त और लसिका प्रणाली के माध्यम से शरीर के अन्य भागो में फैल सकती हैं। कैंसर की मुख्य श्रेणिया कार्सिनोमा- ऐसा कैंसर जो कि त्वचा में या  उन ऊतकों में उत्पन्न होता है,  जो  आंतरिक अंगों के  स्तर या आवरण  बनाते है। सारकोमा- ऐसा कैंसर जो की हड्डी , उपास्थि , मांसपेशियों ,रक्त वाहिकाओं या अन्य संयोजी ऊतकों में शुुुरु  होता हैं। कैंसर के कुछ लक्षण  ●   शरीर के किसी भाग में कड़ापन या गांठ ●  वजन में बिना किसी कारण के वृद्वि या कमी ● कमजोर लगना या बहुत थकावट दूर होना  ● खाने के बाद असुविधा महसूस करना  जिसे भी ये लक्षण या स्वास्थ्य के अन्य परिवर्तन आते है, इसका तुरंत पता लगाने के लिए डॉक्टर से दिखाना चाहिए । आमतौर पर शुरुआती कैंसर दर्द नही करता यदि आपको कैंसर के लक्षण हैं तो डॉक्टर को दिखाने के...

मांस खाना महापाप हैं

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मांस खाना अल्लाह/प्रभु का आदेश नही हैं। मांस खाना महापाप हैं।  एक तरफ आप भक्ति करते हो , और दूसरी तरफ आप बेजुबान निर्दोष जानवरो की हत्या कर उनका मांस खाते हो। सभी जीव परमात्मा की प्यारी आत्मा हैं , तो फिर मांस खाने से परमात्मा प्राप्ति कैसे हो सकती हैं? सोचिए  परमेश्वर कबीर साहेब जी कहते हैं कि -  गरीब , जीव हिंसा जो करते हैं, या आगे क्या पाप।  कंटक जूनि जिहांन में , सिंह भेड़िया और सांप।  जो जीव हिंसा करते हैं उससे बड़ा पाप नही हैं ।  जीव हत्या करने वाले करोड़ो जन्म शेर , भेड़िया व सांप के पाते हैं।  परमात्मा का आदेश नही हैं मांस खाना।  जो व्यक्ति मांस खाते हैं , महापाप के भागी है वे घोर नरक में गिरेंगे। ht3tps://youtu.be/q2cyUwkL2RU

नशा करता हैं सर्वनाश

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नशा नाश का कारण हैं।  नशा इंसान को राक्षस बना देता हैं, नशा चाहे, शराब, सुल्फा, अफीम, हीरोइन आदि किसी का भी करते हो , ये सर्वनाश का कारण बनता हैं।  यह मानव समाज को बर्बाद कर रहा हैं।  शराब मानव जीवन को बर्बाद कर देती है ।इस बारे में परमेश्वर कबीर जी कहते है कि -  भांग तम्बाकू छोतरा, आफु और शराब  कह कबीर कौन करे बन्दगी, ये तो करे खराब । शराब गृह क्लेश को जन्म देती हैं व आर्थिक ,शारिरिक, मानसिक बदहाली अपने साथ लेकर आती हैं। इसे त्यागने में ही भलाई हैं।  आगर आप शराब की लत को नही छोड़ पा रहे हैं तो संत रामपाल जी महाराज से नाम दीक्षा लेकर आप इसे आसानी से छोड़ सकते है। 

कोरोना का इलाज

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1. कोरोना वायरस क्या है? कोरोना वायरस ऐसा वायरस है जिसके संक्रमण से जुकाम से लेकर सांस लेने में जैसी समस्या हो सकती हैं। इस वायरस का संक्रमण दिसम्बर में चीन में वुहान शहर में शुरू हुआ था ।बुखार , खांसी, सांस लेने में तकलीफ इसके लक्षण हैं।  2. कोरोना वायरस के लक्षण क्या हैं?  संक्रमण के फलस्वरूप बुखार, जुकाम, सांस लेने में तकलीफ, नाक बहना,  गले मे खरास जैसी समस्या उत्पन्न होती हैं। ये वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है , इसलिए इसको लेकर बहुत सावधानियां बरती जा रही है।  3.  कोरोना वायरस के बचाव के उपाय क्या हैं?  कोरोना वायरस से बचने के लिए साबुन से हाथों को धोना चाहिए ,अल्कोहल आधारित हैंड रब का इस्तेमाल करना चाहिए , खांसते या छीकते समय मुँह और नाक को रुमाल या टिश्यू पेपर से ढककर रखे। ये सब सावधानी रखने पर भी कोरोना बढ़ता जा रहा हैं। मेडिकल साइंस भी इसका अभी तक कोई इलाज नही ढूंढ पाई हैं।  4. सतभक्ति से कोरोना जैसी महामारी का इलाज। कोरोना जैसी महामारी का इलाज सिर्फ और सिर्फ सतभक्ति हैं जिसको करने से कैंसर, एड्स ओ...