संत रामपाल जी महाराज का समाज सुधार में योगदान
आज समाज ही नही संसार की दशा किसी से छिपी नही हैं। क्या अमीर, क्या गरीब , क्या शिक्षित और क्या अशिक्षित , इस यथार्थ के विषय मे सभी एक मत हैं की आज का समाज बुरी तरह विकृत हो चुका हैं और संसार ऐसे विषम बिंदु पर पहुँच गया है कि यदि उसकी इस गति को यही पर रोक कर ठीक दिशा में नही बढ़ाया गया तो युग-युग की संचित मानवीय सभ्यता का विनाश अवश्यम्भावी हैं। वर्तमान दशा और परिवर्तन की पुकार किसी की आँख- कान से परे नही हैं । आज के असहनीय कष्ट सभी देखते, सुनते और अनुभव कर रहे हैं किंतु इस परिवर्तन की मांग को पूरा करने के लिए कौन आगे बढ़े , यह प्रश्न सामने खड़ा होकर स्तब्धता की स्थिति उपस्थित कर देता है। इस संक्रामक काल मे परिवर्तन पूर्ण करने के लिए , सम्पूर्ण समाज का कर्तव्य है की वह योगदान करें किंतु यह सर्वथा सम्भव नही । इस परिवर्तन को प्रस्तुत करने के लिए समाज के एक विशिष्ट वर्ग को ही आगे बढ़ना होगा। समाज मे फैलने वाली विकृतियां इसी जड़ वर्ग में जन्म लेती ओर पनपती है । यही वह जन साधारण है जो अपनी जड़ता के कारण रोग, शोक , गरीबी , शोषण एवं संतापों से ग्रस्त हैं।...